इक उम्र के
इक सफ़र में
इक पड़ाव की
आस थी!
बढ़ना होगा
या भटक रहे
अब इस
प्रश्न की
तलाश है!!
Posted by लोकेन्द्र in 'लोकेन्द्र विक्रम सिंह...', 'हमारी बात...'
Posted by लोकेन्द्र in "सीधी बात...", 'आक्रोश...', 'राजनीति...', 'लोकेन्द्र विक्रम सिंह...'
आज न्यूज चैनलो पर रेशमा जी के हिम्मत और त्याग भरे कर्म को देखकर हर भारतीयों की तरह मुझे भी गर्व हुआ.. अगर अफसोस हुआ तो सिर्फ अपने यहाँ चल रहे सरकारी तंत्र से की जहाँ ब्लास्ट के जाँच व उसे करने वाले के सुरक्षा के नाम पर करोड़ो और वोट के लिए अनुदान या सहायता राशि के नाम पर लाखों का खर्चा किया जाता है और जिसने अपने परिवार के ऊपर देश को तवज्जो दिया उसे सिर्फ और सिर्फ 25 हजार का नकद इनाम.. मै यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ की मै रुपये से किसी सम्मान को नही जोड़ रहा और न ही अपने जहन में इस बात की थोड़ी सी भी शंका रखता हूँ की इस हिम्मत भरे कदम को उठाने से पहले या बाद में उन्हे किसी प्रकार के इनाम की आशा रही होगी, उन्हे देश में सिर्फ शान्ति चाहिये थी जिसे अपने स्तर तक उन्होने सफल भी बनाया। उनके इस अमूल्य त्याग (अपने पति को ब्लास्ट करने के लिए बम रखने के आरोप में गिरफ्तार करा कर) की किसी भी ईनाम से तुलना किये बिना भी मुझे ये लगता है की वो जिस सम्मान की हकदार थी उन्हे वो नही मिला.. अफसोस है ये मुझे वोट के लिए देश को तोड़ने की राजनीति कर सत्ता का सुख भोगने वालों से..